ब्रज का होरी महोत्सव

आपको सपरिवार “रंग पंचमी” की मंगल बधाइयां और हार्दिक शुभकामनाएं।
समस्त ब्रज मंडल क्षेत्र में माघ शुक्ल “बसंत पंचमी” के आगमन से शुरू होकर “होली-उत्सव” डेढ़ महीने यानि की 45 – 46 दिन समेटे चैत्र कृष्ण “रंग पंचमी” के उल्लासपूर्ण रंगों के साथ समाप्त होता है। आध्यात्मिक जुड़ाव वाले भक्त हो या फिर परंपराओं से मोहित सांस्कृतिक उमंग उत्साह वाले व्यक्ति डेढ़ महीने का यह “फाग-उत्सव” सभी को एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करता है।
जैसे ही बसंत के रंग ब्रज को अपने जीवन्त रंगों में रंगते हैं; वैसे ही फूलों की जीवंतता, खुशबू और रंगों से परिपूर्ण मदमस्त‌ वातावरण, चंचल सार की भावना व‌ प्रेम रस से पूर्ण हंसी ठिठोरी, फागोत्सव का मनमोहन पारंपरिक लोक संगीत और शास्त्रीय संगीत की धुनें व्यक्ति के शरीर और आत्मा को सराबोर करके वृंदावन की उस रमणीय दुनिया में ले जाते हैं, जहां राधाकृष्ण के प्रेम और भक्ति का सार समाहित है।  

कहीं राधा कृष्ण की “मनुहार” करते हुए कहती है कि-“छाड़ो हटो जाओ मोहे ना मारो पिचकारी” लेकिन कृष्ण तो कहां मानने वाले हैं- “होरी खेलत बनवारी बिरज में, होरी खेलत हैं गिरधारी” इस बात से राधा “मान” (नाराज हो) कर सब सखियों के साथ मिलकर कृष्णा को घेर लेती हैं और उनके हाथ पैर बांधकर उनका “नख-शिख सोलह क्षृंगार” करके उन्हें “सखी” (नारी) रूप में सजा देती हैं।
ब्रज में होली के अनेक रंग है। राधा-कृष्ण नाना प्रकार की विभिन्न लीलाएं करते हैं- “वृंदावन कुंजन रच्यो रास आली, आली बनमाली, निरंतर सब सखी दैं ताली, दैं ताली।” ब्रज में होरिकोत्सव का मुख्य आकर्षण है- “रास” जो राधा-कृष्ण और गोपियों के बीच “दिव्य-प्रेम” को दर्शाता नृत्य है। चांदनी रात में किये जाने वाला यह विशेष नृत्य- आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। गोपिया राधा-कृष्ण से उनके प्यार और समर्पण में अपने हृदय और आत्मा को रंगने की इच्छा रखती हैं और फिर- “छुम छन न न बाजत पैजानिया।” रास से ही नृत्य उपजा है और राधा-कृष्ण एवं गोप-गोपियों के नृत्य की झंकार से संगीत के विभिन्न अंगों का प्राकट्य हुआ है। वस्तुत: ब्रज में होरी-उत्सव फाग-उत्सव भक्ति और प्रेम का उत्सव है। प्रेम से भक्ति और भक्ति से समर्पण की पराकाष्ठा उत्पन्न होती है। इसीलिए तो ब्रज में यहां तक कहते है कि-
“सदा होरी संत की,
बारह माह बसंत।
प्रेम रंग जिन पर चढ़े,
उनके रंग अनंत।।”

~ मनोज शर्मा, चार दिशाएं

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